बुधवार, 13 फ़रवरी 2008

मैं आता हूँ चला जाता हूँ


साँसों की तरह हर वादा मैं निभाता हूँ
मैं आता हूँ चला जाता हूँ
कभी गाता हूँ मैं खुशियों में
कभी ग़मों में मैं खो जाता हूँ
चमकता हूँ चाँदनी रातो में कभी
कभी चिराग तले मैं छुप जाता हूँ
मत मान मुझे तू अपना सनम
मैं बस बादलों सा साथ निभाता हूँ
न होगा कही मेरे जैसा कोई
मैं हर चेहरा बदलता जाता हूँ

-तरुण

4 टिप्‍पणियां:

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  2. तरुण जी आपकी रचना बेहद पसन्द आई
    विक्रम

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