शुक्रवार, 24 अक्तूबर 2008

मेरी लडाई

ये ज़िन्दगी मेरी है
इसका हर लम्हा, हर दिन मेरा है
मैंने ही चुनी है हर राह इसकी
हर मंजिल जो अब तक नही मिली
वो भी मेरी ही है
हर साँस की मुश्किलें
हर कदम की कशमकश
हर दिन की हर एक लडाई
बस मेरी ही है
मुझे ही लड़ना है
मेरी हर मुश्किल से
मुझे ही लड़ना है
मेरी हर उलझन से
और कभी मेरे इस मैं से
लड़ाई भी मेरी ही है
इस ज़िन्दगी की
हर एक हार भी मेरी ही है
उस हार से निकलती
आहों की हर आवाज़ भी मेरी ही है
लेकिन एक दिन
हार हार कर जीतने की
हर खुशी भी मेरी ही होगी
मेरी ही होगी वो सब मंजिले
जो मैं गिर गिर कर पाऊंगा
और उन जीत के लम्हों की
हर मुस्कान भी बस मेरी ही होगी
मेरी ही होगी

-तरुण

1 टिप्पणी:

  1. इस ज़िन्दगी की
    हर एक हार भी मेरी ही है
    Nice boss!!Accepting failures is an asset, believe me, that very few people know. Not that I am telling you, I know that you know :P

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