मंगलवार, 7 सितंबर 2010

शिकायत

कहना तो मूझे था
शिकायत तो मूझे करनी थी
पिछले न जाने कितने सालो का
हिसाब भी तो अभी बाकि था
इतनी जीने की जो शर्ते थी
उनके लिए भी कुछ गुफ्तगू ज़रूरी थी
मगर ये ज़िन्दगी जब सामने बैठी
मुझसे फिर कुछ इस तरह खेली
कि मैं जो कुछ भी कहने गया था
वो तो रह ही गया
और उस पर भी
न जाने कितनी और शर्तो का मूझे तोहफा मिल गया
देखो अब अगली मुलाक़ात कब होती है ....

-तरुण

10 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर प्रस्तुति………॥

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  2. nice blog ..i also see this type of content her al;so http://jokes.jagranjunction.com/2010/10/13/hindi-jokes-santa-banta-jokes/

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  3. hey Govind

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  4. Hi.. Ur hindi is amazing... i too try to write sometimes.. i think not better than u but..
    pls check my writings if u get time ..
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  5. आपके ब्लाग पर आ कर प्रसन्नता हुई। एक ही बार में कई आलेखों का आस्वादन किया। भावपूर्ण लेखन के लिए बधाई।
    सद्भावी-डॉ० डंडा लखनवी
    ===================================

    निज व्यथा को मौन में अनुवाद करके देखिए।
    कभी अपने आप से संवाद करके देखिए।।


    जब कभी सारे सहारे आपको देदें दग़ा-
    मन ही मन माता-पिता को याद करके देखिए।।


    दूसरों के काम पर आलोचना के पेशतर-
    आप वे दायित्व खु़द पर लाद करके देखिए।।


    क्षेत्र-भाषा-जाति-मजहब सब सियासी बेडि़याँ-
    इनसे अपने आप को आजाद करके देखिए।।


    हो चुके लाखों तबाही के जहाँ में अविष्कार-
    इनसे बचने का हुनर ईज़ाद करके देखिए।।

    सद्भावी-डॉ० डंडा लखनवी

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