बुधवार, 28 जुलाई 2010

फूल

याद है वो दिन
जब हम दोनों साथ में 
Rose Garden में घूम रहे थे 
और एक फूल को देखकर
मैं उसे तुम्हे देने के लिए तोड़ने गया था 
मगर तुमने मूझे रोक दिया था 
कहा था फूल अपनी बगियाँ में ही अच्छे लगते है 
वो फूल अब तक वहीँ महक रहा है 
और अब जब जब भी मैं 
तनहा अकेला उसके करीब से गुजरता हूँ 
वो मेरी तरफ एक नज़र उठाकर
मायूसी से पूछता है 
वो आज भी नहीं आयी क्या ? 

-तरुण 

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