मंगलवार, 24 फ़रवरी 2009

तेरे नाम से पी ले

मिलता नही है जाम चलो तेरे नाम से पी ले
रात है बहुत दूर तो चलो अब शाम से पी ले

साकी नही है कोई आज न मयखाना है मेरा
शराब मिले कभी तो कभी ख्याल-ऐ-जाम से पी ले

बाज़ार में है तो क्या ज़रूरी कोई खरीदार भी मिले
मिलता है कभी दाम तो कभी बेदाम से पी ले

उसका है शहर में नाम तो तेरा भी क्यूँ न हो
शोहरत मिले कभी तो कभी बदनाम से पी ले

खुदा के लिए छोड़ी कभी खुदा ने पिलाई तुझे
हर बोतल में है भगवान् तो कभी राम से पी ले

कितना चलेगा तू इन राहो की न कोई मंजिल
बैठ कुछ पल को कही आज और आराम से पी ले

-तरुण

3 टिप्‍पणियां:

  1. हर बोतल में है भगवान् तो कभी राम से पि ले ....क्या खूब लिखा है तरुण जी आपकी रचना ने वाकी मन मोह लिया है लिखते रहें
    धन्यवाद

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