मूझे वो गुज़रे ज़माने याद आते है
ज़िन्दगी के दिन सुहाने याद आते है
यूँ तो अकेला ही तो जिया था मैं
फिर भी साथी पुराने याद आते है
आज ही में जी लेते लेकिन
मूझे कल के फ़साने याद आते है
दर्द उस वक़्त भी साहा था लेकिन
उम्मीदों के तराने याद आते है
मेरे अपने तो मूझे याद नहीं लेकिन
मूझे चेहरे अनजाने याद आते है
-तरुण
मूझे वो गुज़रे ज़माने याद आते है
प्रत्युत्तर देंहटाएंज़िन्दगी के दिन सुहाने याद आते है
mujhe bhi.....
मूझे वो गुज़रे ज़माने याद आते है
प्रत्युत्तर देंहटाएंज़िन्दगी के दिन सुहाने याद आते है... Bahut hi Sundar Rachna hai Bhai aapki...
aapki likhi kawitaaen padkar bahut achchhaa lagaa badhaai ho
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