बुधवार, 30 मार्च 2011

मैच

कल रात बड़ी 
मुश्किल से कटी थी मेरी 
आज का दिन भी
कितना बेचैन बेचैन सा है 
आज शाम को फिर से
पुरे देश में कर्फ्यू होगा 
आज फिर गलियों में,
हर घर में एक ही चर्चा होगा 
आज रात को 
कभी जीत का शोर होगा
तो कभी हार के डर का सन्नाटा होगा
कल के अखबारों में भी 
बस एक ही किस्सा होगा
आज शाम का सबको
इंतज़ार है  
आज शाम बहुत खास है 
आज शाम को 
भारत पाकिस्तान का मैच है ...

-तरुण 




4 टिप्‍पणियां:

  1. Like yr poems , specially i was looking for hindi kavitayan from young gen'x.
    u may refer my blog , if ok we may follow.
    http://bajpai.blogspot.com/

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  2. i like your poem very much if you wanted to post this poem on our cricket web site reply to me. mail shailendra@corp.india.com.

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  3. क्रि के ट ज्व र

    चिंता छोडो, सुख से जीओ, अब वर्ल्ड कप आ गया, अब नही कोइ फरियाद, क्रिकेट का वर्ल्ड कप आ गया.
    बच्चा ‘प्रिलिम’ परिक्षा मे पास हुआ था या फैइल, याद नही, सचिन-धोनी का ‘स्कोर’ हमे है याद, वर्ल्ड कप आ गया.
    दफ्तरमे जरूरी ‘फाइलो’के ढेर लगे है? ‘नो प्रोब्लेम’, घर बैठे देखो रमत ये महान, वर्ल्ड कप आ गया.

    आदर्श, ‘स्पेक्ट्रम’ वाले गुंडे जा रहे है देश को लुंट कर,
    हम तो है ‘क्रिकेट’मे गुलतान, वर्ल्ड कप आ गया.

    ‘बजेट’मे पता नही कहा कहा से वो जेब काट लेंगे? सोचुंगा दो अप्रैल क़ॆ बाद, वर्ल्ड कप आ गया.

    सोते जागते मुजे दिख रहे है सिर्फ ‘क्रिकेटरो’ के चहेरे, ’शीला’, ‘मुन्नी’ का अब नही कोइ काम, वर्ल्ड कप आ गया.
    बच्चा रो रहा है, बीवी बुला रही है, दोस्तका फोन है, जवाब दुंगा ‘मेच’के बाद, वर्ल्ड कप आ गया.
    मरनेका मुजे कोइ डर नही लेकीन ‘मेच’ सारे देखने है, ठहर जा तु यमराज, अब तो वर्ल्ड कप आ गया.

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