शुक्रवार, 18 मार्च 2011

होली

रंग लगाओ पानी से नहलाओ 
पानी में चाहे कुछ भी मिलाओ 
गले लगाओ गालो को सहलाओ 
प्यार से सबको अपना बनाओ 
गुज्जिया खिलाओ लड्डू खिलाओ 
 चाहे जितनी भी भंग पिलाओ 
शीला को नचाओ मुन्नी को नचाओ 
जैसे भी चाहे गाने बजाओ 
होली है बस होली मनाओ 
खुद भी खेलो सबको खिलाओ 


1 टिप्पणी:

  1. सुंदर प्रस्तुति ..
    कभी समय मिले तो http://shiva12877.blogspot.com ब्लॉग पर भी अपने एक नज़र डालें .फोलोवर बनकर उत्सावर्धन करें .. धन्यवाद .

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