रविवार, 31 जनवरी 2010

रिश्ता

मैं जिससे भी मिलता हूँ
उसके जैसा हो जाता हूँ
उसके ख्यालो को सोचता हूँ 
उसकी आहटो पे चलता हूँ 
उसकी आवाजो मैं बोलता हूँ 
कोई फिर भी  क्यूँ 
मेरी तरह नहीं सोचता है ...

मैं उसके गीतों को सुनता हूँ
उसकी साँसों को जीता हूँ 
उसके नगमे गाता हूँ 
उसके सपनो को लेता हूँ
कोई फिर भी क्यूँ
मेरी तरह नहीं सोचता है...

-तरुण 


5 टिप्‍पणियां:

  1. bahut hi gehri baat kahi hai Tarun

    usmein itna kho gaya
    main khud ko khud sa nahi lagta
    aur wo kehta hai main ussa nahi lagta


    -Sheena

    उत्तर देंहटाएं
  2. Hello Tarun,

    Jab dil mein bagaawat ki bhawna khatam ho jaati hai tabb shayad aisa hota hai... hum sab mein ghulne se lagte hain...

    Bahut achha likha hai aapne.

    Regards,
    Dimple

    उत्तर देंहटाएं