शुक्रवार, 21 नवंबर 2008

चाँद ज़मीन पे उतरेगा

वो चाँद ज़मीन पे उतरेगा
आएगा मेरे आँगन में
सपनो की बगियाँ महकेगी
हलचल सी होगी तन मन में

तुम हाथ मेरा थामोगी जब
हर राह में मेरे साथ चलोगी
हर मंजिल मिल जायेगी
जब होगी तुम मेरे जीवन में

ये साँसे कुछ ऐसे महकेगी
तेरे आँगन में जैसे फूल खिले
नस नस में होगी खुशबू तेरी
तू होगी मेरी हर धड़कन में

मेरी साँसों पे जो सवाल उठे
तेरे नाम से उनको जवाब मिले
मेरे हाथो की लकीरे तुझसे है
तू है मेरे हर कण कण में


-तरुण

3 टिप्‍पणियां:

  1. इन्तेजार एक बहुत ही सुंदर अनुभूति होती है, और जब इन्तेजार ख़तम होता है वो एक बहुत ही सुखद अनुभव होता है... अगर तुमने किसी की इस्ख किया हो तो तुम समझोगे ये कितना मीठा और प्यारा समय होता है जो हम किसी के इन्तेजार में बिताते है.

    इसी अनुभूति तुम्हारी इस कविता में झलकती है... खूब अच्छे भावः है.

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