सोमवार, 17 नवंबर 2008

मेरी ज़िन्दगी की भी वही एक कहानी है

ये शाम देखा कितनी सुहानी है
हर तरफ़ जैसे बस तेरी कहानी है

ये जो आँखों से टपकते है आंसू
तेरे प्यार की एक ये भी निशानी है

आज कान्हा ने एक चेहरा है बदला
आज एक और मीरा दीवानी है

अब तेरे बिन घुटती है साँसे मेरी
और ये ज़िन्दगी बस एक परेशानी है

तुम चाँद से पूछ लो दास्ताँ उसकी
मेरी ज़िन्दगी की भी वही एक कहानी है

-तरुण

3 टिप्‍पणियां:

  1. aaj ek aur meera divani hai.....bahut khoob....badhai....aapka blog bhi vakai kabile tarif hai...

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  2. Humen lagta hai aapko software engineer nahi ek kavi hona chahiye tha. keep it good work. nice to read ur poetry.

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