बुधवार, 28 अप्रैल 2010

ज़िन्दगी की रफ़्तार

ज़िन्दगी की रफ़्तार कुछ ऐसी होती है
कि कभी पल दो पल में
साल गुज़र जाते है
और कभी
पल दो पल ही साल बन जाते है
कभी सालो को गिनना
बहुत आसान हो जाता है
और कभी
पलों को गिनते गिनते ज़माने गुज़र जाते है
ज़िन्दगी कि रफ़्तार कुछ ऐसी होती है
कि कभी पल दो पल के ख्वाब
ज़िन्दगी भर को महका जाते है
और कभी न जाने कितने बरस
बस यादों में रह जाते है
ज़िन्दगी कि रफ़्तार कुछ ऐसी होती है
कि अक्सर बचपन के दिन
आँखों में रह जाते है
और बुडापे के दिन
आखिरी साँसों तक साथ निभाते है
ज़िन्दगी के दिन इतने अजीब होते है
कि इसको समझने से पहले यह ख़त्म हो जाते है
बस हम एक ज़िन्दगी में
नासमझ रह जाते है ....


-तरुण

2 टिप्‍पणियां:

  1. वाह्………………क्या बात कही है………………।सच यही तो ज़िन्दगी है…………………एक पहेली, एक सहेली और कभी अकेली।

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